
बिहार के एक कोर्ट परिसर से सामने आई घटना ने लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में एक व्यक्ति को स्वतंत्रता सेनानी Subhas Chandra Bose (नेताजी) की बड़ी म्यूरल के सामने आपत्तिजनक हरकत करते देखा गया।
नेताजी को भारत में केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में अदालत जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की घटना ने जनभावनाओं को और अधिक आहत किया है।
कानून के मंदिर में अनादर?
घटना जिस जगह हुई, अदालत परिसर, वह खुद न्याय और मर्यादा का प्रतीक है। ऐसे स्थान पर राष्ट्रीय नायक के चित्र के साथ दुर्व्यवहार ने प्रशासनिक सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
इतिहास की दीवार, संवेदनहीनता का दाग
देश जिन नायकों की विरासत पर गर्व करता है, उनकी तस्वीरें आज दीवारों पर तो हैं, लेकिन क्या हम दिलों में भी उतनी ही जगह दे पा रहे हैं? यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की हरकत नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन और जागरूकता की परीक्षा भी है।

इतिहास के पन्नों में नेताजी का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है लेकिन दीवारों पर लिखी इज्जत की रक्षा आज की पीढ़ी को ही करनी होगी।
यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी का भी है। राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान की रक्षा केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और दोषी के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
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